ग़ुस्से पर निहार करना

ग़ुस्से पर निहार करना हुस्न का इतना गुरुर ना करना इश्क पर थोड़ा गौर करना तीखी नजर से ना देखो इतना प्यार से ज़रा नजरे फेरना ग़ुस्से पर निहार करना कभी मुझपर भी निहार करना क्या छिपा है दिल में मेरे ज़रा इसपर गौर करना सिख लेना प्यार करना कभी…

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तुम्हारी निगाहें

तुम्हारी निगाहें तुम्हारी निगाहें क्या कहे हम जान ना पाए हम देखते ही रहे गहराई समझ ना पाए बिना पतवार झील में डूबतेही रहे प्यार के मोती अबतक ना ढूंढ पाए हमें जो भायी है तसबीर तुम्हारी ना हटती कभी वह कारण खरी मन भी तेरा क्यों इतना भाया अबतक…

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अकेला मै तनहाइमे

अकेला मै तनहाइमे मैंने सिर्फ साद की आशा की थी भूल गई मुझे सहारो की मंजिल राह में कबसे ताकता बैठा हूँ कोई प्यार की साद ना हुई हासिल ना कोई यहाँ है जिसे गम सुनाऊ ना कोई यहाँ जिसे अपना कहूँ तुम तो भूल गए छोड़ कर वीराने में…

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घुस्सा भी तेरा, मद भरा

घुस्सा भी तेरा, मद भरा घुस्सा भी तेरा, मद भरा जिसमे छिपा है प्यार अदमरा आदि बनगया हूँ तुझसे में तेरे बगैर जीना दुस्वार मेरा ग़ुस्से में तेरा हुस्न निखरे प्यार करनेको जी तरसे बंद हातो में तुझे जखड़कर दर्द से बेपरवा होता हूँ में बुराई जो तू कहती है,…

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हुस्न का कद्र है जहां

हुस्न का कद्र है जहां हुस्न का कद्र है जहां इश्के अदब झुक जाता है चाहत नाकाम क्यों न हो दिल में वफ़ा तो होती है हुस्न चाहे मिले ना मिले उसकी इबादत तो होती है शागिर्द जो बने है दीवाने महक तो बहकती रहती है चाहत की आहट जिसमे…

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