चूड़ियों के जाल में

    चूड़ियों के जाल में चूड़ियों के जाल में घुंगट के आड़ में कंगना की खनखन से पायल की छम छम से हँसी की गुनगुन होगी गालोंपर गुलशन होगी देखना भवर में मेरे तुम्हे ऐसी लुभाऊँगी ना सवर पाओगे दुनिया भूल जाओगे सारे जो अपने तुझे है ना पहचान…

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तिल तिल गुड़

तिल तिल गुड़ तिल तिल गुड़ परोस के क्यों हमें लुभाया जाये खुद ज़रा सामने आओ तो जिंदगी गुड़ बन जाये चुपकेसे ना तरसाओ इतना मिठास तुममे है पूरी भरी क्यों ऐतराज है हमें बताओ क्या हमसे कुछ भूल हुई कभी ना दिखाया मुखड़ा अपना और शर्म की गाल की…

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ग़ुस्से पर निहार करना

ग़ुस्से पर निहार करना हुस्न का इतना गुरुर ना करना इश्क पर थोड़ा गौर करना तीखी नजर से ना देखो इतना प्यार से ज़रा नजरे फेरना ग़ुस्से पर निहार करना कभी मुझपर भी निहार करना क्या छिपा है दिल में मेरे ज़रा इसपर गौर करना सिख लेना प्यार करना कभी…

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तुम्हारी निगाहें

तुम्हारी निगाहें तुम्हारी निगाहें क्या कहे हम जान ना पाए हम देखते ही रहे गहराई समझ ना पाए बिना पतवार झील में डूबतेही रहे प्यार के मोती अबतक ना ढूंढ पाए हमें जो भायी है तसबीर तुम्हारी ना हटती कभी वह कारण खरी मन भी तेरा क्यों इतना भाया अबतक…

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अकेला मै तनहाइमे

अकेला मै तनहाइमे मैंने सिर्फ साद की आशा की थी भूल गई मुझे सहारो की मंजिल राह में कबसे ताकता बैठा हूँ कोई प्यार की साद ना हुई हासिल ना कोई यहाँ है जिसे गम सुनाऊ ना कोई यहाँ जिसे अपना कहूँ तुम तो भूल गए छोड़ कर वीराने में…

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